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से बहा पहलवान भी शेर से नहीं छड़ सका । मगर इस जवान की
हिम्मत को देखिए कि अकेला तीन-तीन शेरों से लड़ता रहा। यह
आदमी का काम नहीं है और“शगर है तो कोई आदमी कर दिखाए !
हुजूर,के लिर की कसम, यह जादू का खेल है । चल्छाह, जो इसमें फर्क
हो तो नाक फटवा डाहूँ।
/ “ नवाब--सुभान-अब्लाह, बस यही बात है। * “'
नत्य--हाँ, यह साना । यहाँ पर हम भी कायल हो गए। इंत्ाफ
शर्त है। ह
“ नवाब --और महींतो क्या, ज़रा-सा आदमी श्र आधे दर्ज शेरों
से कुश्ती लड़े। ऐवा हो सकता है मरा ! शेर लाख कमज़ोर हो जाय,
फिरशेर है। ये सब जादूगर हैं। जाहु'के जोर से शेर रीछ और सब
जानवर दिखा देते हैं । अधल में शेर-वेर कुछ भी नहीं हैं ।" सब जाहू
ही जादू है।
-“, नत्पथु--हुजूर, हर तरह से, रुपया खींचते हैं। हुजूर के सिर की कसम ।
- हिन्दोस्तानी इससे अच्छे शेर बनाकर' दिखा दें । क्या यहाँ जादूगरी हट
आज्ञाद-कथा ण्‌ज७
ही नहीं? सगर कदर तो फोई करता ही नहीं । हुजूर, ज़रा गौर करते तो
सालूम हो जाता कि शेर रूटते तो थे, मगर पुतलियाँ नहीं फिरती थीं ।
बस, यहीं माछूप हो गया कि जादू का खेल है ।
ज़बरखा--वल्लाह, में भी यही फानेवाला था। मियाँ नत्म मेरे
सुह से बात छीन ले यपु ।
नत्व-+सला शेरों को देखकर किसी को भी ठर छगता था | इमान
से कहिएगा।
ज़बरखाँ--मगर जब जाए का खेल है दो शेर से लड़ने में कमाल
ही क्या है ।
नवाब--झऔोर सुनिए, इनके नज़दीक कुछ कमाल ही नहीं ! भाप तो
वैसे शेर धना रीजिए ! क्या दिल्‍्लगीयाज़ी है ? कहने रंगे हसमें कमाऊ
ही क्या हे!
: मिरजा--हुजूर, यह ऐसे ही बेपर की बढ़ाया करते हैं।..,
नत्प--जादू के शेर्रो से न छड़ें तो क्या सचमुच के शेरों से लड़ें?
वाह्द री क्रापकी अय्छ ! ;
नवाब--कहिए तो उससे जो सम्तकदार हो। बेसमऋ से कहना
फूजल है।
नत्पू--हुज़ूर, कमाऊ यह है कि हज़ारों आदुसी यहाँ बैठे हैं, सगर
एक की समझ में न भ्राया कि क्‍या धात है ।
नवाब-समके तो हमीं समके ! ., । ल्‍
मिरज़ा--हुजूर की क्‍या वात है । वल्छाह, खूब समके | - -
इतने में एक खिलाड़ी ने एक रीछ को अपने ऊपर रादा और दूसरे
को पीठ पर एक पाँच से सवार होकर उसे दीड़ाने छया । छोय दूग हो
गए। सुरेयावेगम ने, दस आदमी को पथाप्त रुपए इनाम दिए ।- -:
ज्जट आजाद-कथा
वकील साइयव ने यह केफियत देखी तो सुरेयायेगम का पता लगाने
के लिए घेकरार हों गए | सल्दारब्रप्श से कट्टा--मैथा संरारू, इस बेगम
का पता लगाशो | कोई बढ़ी च्सीर-करगरीर साछ़ुम होती हैं। '
' घलारबख्श->हमें तो यह अफ़पोस है कि तुम भा क्‍यों न हुए ।
धस, तुम एप्ती लायक हो कि रस्पों से अकड़कर दौदाएु।:
' चंकील-भ्रच्ठा-बचा, क्या घर न चलोगे ?
सलारयख्य--घलेंगे क्‍यों नहीं, क्या तुम्हारा कुछ डर पड़ा है ९
चश्कीक--मालिक से ऐसी बातें फरता है ? 'सगर यार, सुरैयावेगम
का पता छयाओो |
” मिर्या श्राधाद, नवाब और वरील दोनों की यासे सुन-सुनकर दिऊ
ही दिल में एस रहे थे। इतमे में नचाव साहब ने आज़ाद से पुछा--स्ों
जनाव, यह सब नजरवन्दी ऐ या कुछ और ?
चधाजावु-हंजात, यह सप तिलस्मात का खेल है । श्रक्छ काम नहीं
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करती। .'* +
नवाय--सुना है, पाँच कौंस के २धर का श्रादमी 'अगर घाए तो उस
पर जादू का खोक् असर न हो । ४
आाजादु--मगर इनका जादू यडा कडा जादू है। दम मजिल का
आदिमी भी ञाए तो चक्रमा खा जाए । *
नवाब-पश्रापके नजदीक वह छौन अँंगरेज बैठा था ?
झाज़ाद--जनाव, अगरेज़ और हिन्दोस्तानी कहीं नहीं है | पव जादू
का खेल है।..* 02 ः
* नवाब-इनसे जादू सीखना चाहिए। सा
' झाजाद-सैरूर सीखिए | हजार काम छोड़र।
जब तमाशा ख़त्म हो गंया तो सुरेयावेगम्त ने चाज़ादको बहुत तलाश
2 कई 72 "३५
शराया, मगर हही एसरा सता ने घका पट रहते हो मुह कं गरिय हे पाए
बढ दि थे। पगय में दारियाजी की शश डाश कोर इाहए-+सगा पु
इ्षाल हाई ने लाओगे सो शुस्दारों लभठ लिपायकर झरयों शु मर्रगी ।
रे हि हु
निरसद्रवों पारी कूद
मुकाम हि यो घाहाद को पदाई में बहुत देर तक होगा कीं,
झमी दारोगा पर चटाई, कमो मडासों 4र दिया, हि! सोशी कि
सहारस्ती ह नाम हे मादक शुलवाया पड़ी शझुहीा हो गई, झनीं
प्रयाष्ठ फातों लि दाद के पर ये 7, कान इससे हो तस्मर आगे, ॥/घर
काम ऐड्डे आरगे। राग भोग राग थी, मररियाँ थो रही थीं, मदश द्वार
ड्घता था, धाएर-सर मी चस्तादा था मंधर मुर्या कान की भी ध्िर्पा
अगाद मे एराम कर दी थी+ * |
भरे आते हैं आँसू आय में पे यार कया बाइस,
निकलते 7 सदफ़ से योदरें दाइबार पया याहस ?
सारी राज परेशानी में गुगरों, दि इझरार था, कियी बट धस

नही आता था, सो्धी दि ग्गर मियां शासाद पारे पर गे आये मो का
हैं है गी, दूदें दारोगा पर दिख ही दिल में कत्दाती थीं कि क्या तक मे
प्रा । मगर धाज्ाद सो प्ररक्का बाह्य कर से थे लोटकट मझा मि्ेगे,
फिर ऐसे बेदद कैसे हा गये कि हमाझा सास सी सुना और फरवा
न की । यह सोचे पोषते उसने यह मंगल मामी शुरू की
न दिल को चेन सरकर- भी हवाए यार में आए;
.._तड़पकर खुलद से फिर कृचर दिलदार में आए ।
अजब रादत मिली, फुट दीन-दुनिया की नहीं परवा;
जुने के साया में पहचे बड़ी सरकार में आए।
६० श्राज़ादनकवा
एवज जब एक दिल के लाख दिल हों मेरे पहल में;
तड़पने का -सजां तब फुरक़ते दिलिदार में आए।'
नहीं परवा हमारा सिर जो कट जाए तो कढ जाए;
थके वाजू व काविल का न वल तलवार में आए |
दमे-आखिर वह पोंछे अश्क 'सफदर' अपने दामन से;
लाही रहम इतना तो मिजाजे यार में आए।
सुस्यावेगम को सारो राव जायते युज्री । सबेरे दारोगा ने झाकर

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